अरुणाचल प्रदेश, ईटानगर: मुख्यमंत्री कार्यालय ने मीडिया रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण और निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2 दिसंबर को राज्य को 2015 से 2025 के बीच दिए गए ठेकों का ब्यौरा देने के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों से जुड़ी कंपनियों को दिए गए ठेके भी शामिल हैं। सीएमओ ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि एक रिट याचिका में सूचीबद्ध लगभग 1,000 करोड़ रुपये के लगभग 1,000 ठेकों में से केवल एक अंश ही खांडू के रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली कंपनियों को मिला। कार्यालय ने कई मीडिया संगठनों पर अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए गए वादों को नजरअंदाज करने और केवल याचिकाकर्ताओं के दावों को ही प्रमुखता से दिखाने का आरोप लगाया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने जनवरी 2024 में नागरिक समाज समूहों वॉलंटरी अरुणाचल सेना और सेव मोन रीजन फेडरेशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें कथित अनुबंध अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि वह आदेश पारित करने से पहले इस बात पर विचार करेगी कि क्या किसी जांच की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार याचिका में राज्य सरकार पर तवांग जिले में कई ठेके कथित तौर पर मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली फर्मों को देने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने 2009 से अब तक दिए गए कार्यों की सूची संलग्न की, जिसमें दावा किया गया कि खांडू के परिवार के सदस्यों को लाभ पहुँचाने के लिए निविदा मानदंडों का उल्लंघन किया गया था।
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